भारतीय संविधान के विदेशी स्रोत

भारत के संविधान के निर्माण में बहुत सारे आम व्यक्तियों ने अपना योगदान दिया इसके साथ ही भारत के संविधान की जब निर्माण हो रही थी हमारे देश के बुद्धिजीवियों ने जैसे कि पंडित जवाहरलाल नेहरू डॉ भीमराव अंबेडकर सरदार वल्लभभाई पटेल अपना अहम योगदान दिया है और इस प्रकार से हमारे भारत देश का अपना संविधान बनकर तैयार हुआ भारत का संविधान का निर्माण बहुत सारे देशों की संविधान से सहायता लेकर की गई है भारत के संविधान के निर्माण में देशों के संविधान से जो सहायता ली गई है वह इस प्रकार से

  1. संयुक्त राज्य अमेरिका भारत के संविधान के निर्माण में संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान का भी बहुत सारा अच्छी-अच्छी बातों को समावेश किया गया है भारत के संविधान में अगर में देखें तो हमें पता चलता है कि भारत का मौलिक अधिकार संयुक्त राज्य अमेरिका के मौलिक अधिकार से लिया गया है इसके साथ ही साथ न्यायिक पुनरावलोकन संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से भारत के संविधान में जोड़ा गया है संविधान न्यायपालिका की स्वतंत्रता अमेरिका के संविधान से लिया गया है भारत के संविधान में |
  2. ब्रिटेन के संविधान से संसाधनों की शासन प्रणाली तथा एकल नागरिकता जैसी चीजों को समावेश किया गया है इसके साथ ही साथ विधि निर्माण की प्रक्रिया भी ब्रिटेन के संविधान से लिया गया है हम भारत के संविधान के निर्माण में ब्रिटेन के संविधान से संसाधनों प्रणाली को लिए हुए जिसमें कि संसद होते हैं
  3. आयरलैंड से नीति निर्देशक के सिद्धांत को लिए गए हैं राष्ट्रपति के निर्वाचन मंडल की व्यवस्था आयरलैंड के संविधान से ली गई है राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा में साहित्य काला विज्ञान व समाजसेवा इत्यादि के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त व्यक्तियों का मानव ने भी आयरलैंड के संविधान से लिया गया राष्ट्रपति के द्वारा भिन्न-भिन्न प्रकार के व्यक्तियों ने की जाती है
  4. ऑस्ट्रेलिया से प्रस्तावना की भाषा तथा समवर्ती सूची का प्रावधान इसके साथ ही साथ केंद्र एवं राज्य के बीच संबंध तथा शक्तियों का विभाजन भी ऑस्ट्रेलिया से लिया गया है संसदीय विशेषाधिकार भी आस्ट्रेलिया से ही लिया गया है जब भी हम बात करते हैं समवर्ती सूची की और समवर्ती सूची के प्रावधान की तो हमें यह समझ लेना चाहिए कि आस्ट्रेलिया के संविधान से लिया गया और हम जब विभाजन की बात करते हैं क्योंकि विभाजन होती है राज्य और केंद्र के बीच में तो यह भी और यह भी तरीका ऑस्ट्रेलिया के संविधान से लिया गया है प्रस्तावना की भाषा के साथ-साथ समवर्ती सूची आस्ट्रेलिया से ली गई
  5. जर्मनी से आपातकाल के परिवर्तन के दौरान राष्ट्रपति को मौलिक अधिकार संबंधी शक्तियां जर्मनी के संविधान से लिया गया है हम इस प्रकार से ही याद रख सकते हैं कि जर्मनी एक ऐसा देश है जहां पर आपातकाल एक बड़ा ही अहम रोल रहा है हम जानते हैं जर्मनी के तानाशाह के बारे में तो हमेशा याद रखेंगे कि आपातकाल के परिवर्तन के दौरान राष्ट्रपति को जो मौलिक अधिकार संबंधी शक्तियां दी गई है यह मौलिक अधिकार संबंधी राष्ट्रपति की शक्तियां जर्मनी से ली गई है जर्मनी में राष्ट्रपति को मौलिक अधिकार वह भी आपातकाल के परिवर्तन के समय में या गया था और यह अधिकार जो जर्मनी से लिया गया है हमारे भारत के संविधान में भी समावेश किया गया अमित प्रकार से याद रखेंगे
  6. कनाडा के संविधान से संघात्मक विशेषताएं ली गई है इसके साथ ही साथ अवशिष्ट शक्तियां केंद्र के पास जो दी गई है कनाडा के संविधान से लिया गया है राज्यपाल की नियुक्ति प्रक्रिया साथी साथ संघ शक्ति विभाजन कनाडा से लिया गया है हमें यहां पर एक बात बहुत अच्छी तरीके से समझ लेनी चाहिए शक्तियों का विभाजन कनाडा के संविधान से लिया गया है संघ और राज्यों के विभाजन के बारे में बताता है हमारे भारत के संविधान में लिया गया
  7. दक्षिण अफ्रीका के संविधान संशोधन की प्रक्रिया के प्रावधान को लिया गया है दक्षिण अफ्रीका में संविधान संशोधन को याद रखने के लिए आपको यह चाहिए क्या याद रखें बहुत ही किया जा रहा है याद रखें संविधान संशोधन की प्रक्रिया
  8. रूस से मौलिक कर्तव्यों के प्रावधान को लिया गया है साथ ही साथ रूप से इस बात की पुष्टि करता है कि प्रत्येक मानव का कुछ मौलिक कर्तव्य होना चाहिए जो भी लोग उस देश में रह रहे हैं उनका अपना एक मौलिक कर्तव्य उन्हें कौन सी काम करना चाहिए कौन सा काम उन्हें करने के लिए देश उन्हें लव करता है क्योंकि अगर कोई भी व्यक्ति उस देश में रहता है इसके साथ ही साथ उसे इस बात की पुष्टि करनी पड़ती है कि उस देश की मौलिक कर्तव्यों का पालन करना पड़ेगा और करना भी चाहिए
  9. जापान से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया को लिया गया है जापान को हम इस प्रकार से याद रख सकते हैं की विधि को स्थापित करने की प्रक्रिया को बताता है जापानी हमें यह बताता है कि किस प्रकार से विधि को स्थापित करना चाहिए यह बहुत ही जरूरी चीज है की विधि कौन किस प्रकार से स्थापित करें ताकि वह सही तरीके से चल सके और विधि देश के लिए फायदेमंद नहीं हो जब भी हम विधि की बात करते हैं और विधि की स्थापना की बात करते हैं तो यह जापान से लिया गया है भारत के संविधान में समावेश किया गया है

तो चलिए अब हम भारत के संविधान में जो विदेशों से स्रोत लिया गया है भारत के संविधान के निर्माण करते समय और निर्माण करने में जो भारत ने विदेशी स्रोतों का उपयोग किया है और जिन जिन देशों से भारत ने संविधान के कुछ भागों को लिया हुआ है उसे हम लोग एक सम्राट फॉर्म में एक संकेत फॉर्म समझते हैं ताकि हम उसे याद रख सकेंगे सबसे पहले हमें यह याद रखना है कि भारत जो है वह संयुक्त राज्य अमेरिका से मौलिक अधिकार को लिया हुआ है न्यायिक पूर्ण आवृत्ति संविधान की सर्वोच्चता को भी अमेरिका से ही लिया गया साथी साथ महाभियोग जैसी चीजें भी अमेरिका से ली गई है न्यायपालिका की स्वतंत्रता भी अमेरिका से ही लिया गया हमें यहां पर एक बात और समझना चाहिए एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की विधि एवं वित्तीय आपात भी अमेरिका से लिया गया है इस प्रकार से समझ सकते हैं कि मौलिक अधिकार हो या फिर न्यायपालिका की स्वतंत्रता चीजें संयुक्त राज्य अमेरिका से ली गई है

मैं आप सभी लोगों को एक और भी अहम बातें बताना चाहता हूं जो आपके लिए बहुत जरूरी है और समझना चाहिए भारत के संविधान के अनेक देसी और विदेशी स्रोत हैं यह बात तो सच है लेकिन भारतीय संविधान पर सबसे अधिक प्रभाव भारतीय शासन अधिनियम 1935 का है यह बात आपको बहुत अच्छे तरीके से समझना चाहिए कि ब्रिटेन के द्वारा लाया गया भारतीय संविधान और भारतीय शासन अधिनियम 1935 का प्रभाव बहुत ज्यादा है भारत के संविधान के निर्माण भारतीय संविधान के 395 अनुच्छेद में से लगभग 250 अनुच्छेद भारत के संविधान में

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